इस लेख में हम आसान हिंदी भाषा में स्टेप-बाय-स्टेप पूरी प्रक्रिया बताएंगे – क्या करना है, कितना समय है, जरूरी दस्तावेज और आम गलतियाँ। यह गाइड आम लोगों और छोटे बिजनेस वालों के लिए खास है।नोट: यह सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। अपने केस के लिए वकील से जरूर सलाह लें।चेक बाउंस क्या है और क्यों होता है?बैंक चेक जमा करने पर पैसा नहीं देता तो चेक बाउंस होता है। बैंक "Insufficient Funds" या "Funds Insufficient" लिखकर वापस कर देता है।
आम कारण:
डिस्क्लेमर: AdvocateSakar ब्लॉग पर यह लेख केवल जागरूकता के लिए है। यह कानूनी सलाह नहीं है। कोई कार्रवाई करने से पहले योग्य वकील से परामर्श करें। ब्लॉग या लेखक किसी नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं।पोस्ट पसंद आई तो शेयर करें। कमेंट में अपना अनुभव बताएँ!
आम कारण:
- खाते में पैसे कम होना
- सिग्नेचर गलत होना
- चेक की वैलिडिटी खत्म होना (RBI नियम: जारी होने की तारीख से 3 महीने तक वैलिड)
- खाता बंद होना
- चेक कानूनी दायित्व (legally enforceable debt) के लिए दिया गया हो।
- बाउंस "कम पैसे" या "खाता बैलेंस से ज्यादा" की वजह से हुआ हो।
- चेक होल्डर ने बाउंस की जानकारी मिलने के 30 दिनों में लिखित नोटिस भेजा हो।
- चेक देने वाले ने नोटिस के 15 दिनों में पैसा नहीं चुकाया हो।
- बैंक चेक वापस करते समय रिटर्न मेंमो देता है – इसमें बाउंस की वजह लिखी होती है।
- मूल चेक + मेंमो सुरक्षित रखें। ये कोर्ट में मुख्य सबूत हैं।
- मेंमो मिलने के 30 दिनों के अंदर वकील से लीगल नोटिस भेजें।
- नोटिस में चेक डिटेल्स, राशि, बाउंस डेट और 15 दिनों में पेमेंट की माँग लिखें।
- रजिस्टर्ड AD या स्पीड पोस्ट से भेजें। UPC रखें।
- नोटिस की कॉपी और पोस्टल रसीद संभालें।
- अगर 15 दिनों में पूरा पैसा मिल जाए तो केस खत्म।
- नहीं मिला तो आगे बढ़ें।
- नोटिस के 15 दिन खत्म होने के अगले 30 दिनों में मजिस्ट्रेट कोर्ट में कंप्लेंट फाइल करें।
- जगह: जहाँ चेक जमा किया था (पेयी की बैंक ब्रांच का क्षेत्र) – 2015 अमेंडमेंट के अनुसार।
- मूल चेक
- रिटर्न मेंमो
- नोटिस की कॉपी + पोस्टल रसीद
- लेन-देन का प्रूफ (इनवॉइस, एग्रीमेंट आदि)
- गवाहों की लिस्ट
- धारा 143A: ट्रायल कोर्ट केस के दौरान इंटरिम कंपंसेशन (चेक राशि का 20% तक) ऑर्डर कर सकती है। आरोपी को तुरंत देना पड़ता है।
- धारा 148: अपील में आरोपी को 20% राशि डिपॉजिट करनी पड़ती है। ये नियम पेयी को जल्दी राहत देते हैं और केस को तेज चलाते हैं।
- अधिकतम 2 साल जेल + दोगुना जुर्माना।
- कोर्ट सिविल रिकवरी भी ऑर्डर कर सकती है।
- ज्यादातर केस समझौते से खत्म होते हैं (कंपाउंडेबल)।
- 30 दिन की टाइम लिमिट मिस न करें।
- चेक 3 महीने से पुराना न लें (स्टेल चेक बैंक एक्सेप्ट नहीं करता)।
- नोटिस साधारण पोस्ट से न भेजें।
- समझौता लिखित में लें।
डिस्क्लेमर: AdvocateSakar ब्लॉग पर यह लेख केवल जागरूकता के लिए है। यह कानूनी सलाह नहीं है। कोई कार्रवाई करने से पहले योग्य वकील से परामर्श करें। ब्लॉग या लेखक किसी नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं।पोस्ट पसंद आई तो शेयर करें। कमेंट में अपना अनुभव बताएँ!
