यूरोप में यह अधिकार मजबूत है, लेकिन भारत में अभी पूरी तरह कानूनी मान्यता नहीं मिली। फिर भी कई लोग कोर्ट के जरिए अपना पुराना डेटा हटवा चुके हैं। 2026 में सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर बड़ा फैसला करने वाला है – खास तौर पर ऑनलाइन न्यूज़ आर्टिकल्स पर।
इस BLOG में हम आसान भाषा में बताएंगे:
- RTBF क्या है
- भारत में इसकी स्थिति क्या है
- DPDP Act 2023 का रोल
- गूगल से डेटा कैसे डिलीट करवाएं
- सफल केस और सीमाएँ
कुछ महत्वपूर्ण कोर्ट फैसले:
- 2024: मद्रास हाई कोर्ट ने एक केस में Indian Kanoon से जजमेंट हटाने का ऑर्डर दिया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे स्टे कर दिया।
- 2025: दिल्ली हाई कोर्ट ने कुछ केस में न्यूज़ वेबसाइट्स से आर्टिकल हटाने का ऑर्डर दिया।
- कई हाई कोर्ट्स (केरल, दिल्ली, गुजरात) ने सेन्सिटिव केस (यौन उत्पीड़न, एक्विटल) में RTBF को मान्यता दी।
- सेक्शन 12: राइट टू इरेसूर (डेटा मिटाने का अधिकार) – आप डेटा फिड्यूशरी (कंपनीज) से अपना पर्सनल डेटा डिलीट करवा सकते हैं।
- लेकिन यह सर्च इंजन्स पर डायरेक्ट लागू नहीं होता। सर्च इंजन्स को "इंटरमीडियरी" माना जाता है।
- फेज 2 (नवंबर 2026) में पेनाल्टी और डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड का पूरा रोल शुरू होगा।
- गूगल का रिमूवल टूल ओपन करें → https://support.google.com/websearch/answer/9673730
- "Remove personal info" चुनें।
- अपना नाम, URL, वजह बताएँ (जैसे अप्रासंगिक, नुकसान पहुँचा रहा)। गूगल रिव्यू करता है और जवाब देता है (कुछ हफ्तों में)।
- अगर गूगल मना करे तो कोर्ट जाएँ → हाई कोर्ट में रिट पिटिशन फाइल करें। कोर्ट ऑर्डर से गूगल मानता है।
- जोरावर सिंह मुंदी केस (2021-2022): गुजरात हाई कोर्ट ने एक्विटल के बाद कोर्ट जजमेंट हटाने का ऑर्डर दिया।
- 2025 दिल्ली केस: पैटियाला हाउस कोर्ट ने न्यूज़ आर्टिकल्स हटाने का ऑर्डर दिया।
- कई सेलिब्रिटी और आम लोग कोर्ट से सफल रहे, लेकिन प्रेस फ्रीडम का मुद्दा हमेशा आता है।
- प्रेस फ्रीडम और पब्लिक इंटरेस्ट → न्यूज़ आर्टिकल्स आसानी से नहीं हटते।
- इंटरनेट की प्रकृति → एक जगह से हटे तो दूसरी जगह रह सकता है।
- कोई ऑटोमैटिक अधिकार नहीं → कोर्ट जाना पड़ता है (महंगा और समय लगता है)।
- 2026 में सुप्रीम कोर्ट फैसला आने के बाद स्थिति क्लियर हो सकती है।
DISCLAIMER: AdvocateSakar ब्लॉग पर यह लेख केवल जागरूकता के लिए है। यह कानूनी सलाह नहीं है। कोई कार्रवाई करने से पहले योग्य वकील से परामर्श करें। ब्लॉग या लेखक किसी नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं।पोस्ट पसंद आई तो शेयर करें। कमेंट में बताएँ – क्या आपने कभी ऐसा ट्राई किया?
