Right to Be Forgotten: भारत में क्या आप गूगल से अपना पुराना डेटा डिलीट करवा सकते हैं? 2026 अपडेट



नमस्ते! इंटरनेट पर आपका पुराना फोटो, कोर्ट केस, न्यूज़ आर्टिकल या कोई व्यक्तिगत जानकारी सालों बाद भी दिख रही है? आप चाहते हैं कि वो गूगल सर्च से हट जाए? यहाँ बात
राइट टू बी फॉरगॉटन (Right to Be Forgotten - RTBF) की होती है।


यूरोप में यह अधिकार मजबूत है, लेकिन भारत में अभी पूरी तरह कानूनी मान्यता नहीं मिली। फिर भी कई लोग कोर्ट के जरिए अपना पुराना डेटा हटवा चुके हैं। 2026 में सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर बड़ा फैसला करने वाला है – खास तौर पर ऑनलाइन न्यूज़ आर्टिकल्स पर।
इस BLOG में हम आसान भाषा में बताएंगे:
  • RTBF क्या है
  • भारत में इसकी स्थिति क्या है
  • DPDP Act 2023 का रोल
  • गूगल से डेटा कैसे डिलीट करवाएं
  • सफल केस और सीमाएँ
नोट: यह सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। अपने मामले में वकील से सलाह लें।राइट टू बी फॉरगॉटन क्या है?राइट टू बी फॉरगॉटन का मतलब है कि व्यक्ति अपने पुराने, अप्रासंगिक या नुकसान पहुँचाने वाले व्यक्तिगत डेटा को इंटरनेट से हटवा सकता है। खासकर सर्च इंजन्स (जैसे गूगल) से लिंक्स डिलीट करवाना।यूरोप में GDPR (2018) के तहत यह मजबूत अधिकार है। वहाँ आप गूगल से आसानी से पुराना डेटा हटवा सकते हैं। लेकिन भारत में अभी ऐसा कोई स्पष्ट कानून नहीं है।भारत में राइट टू बी फॉरगॉटन की स्थिति (2026 अपडेट)भारत में RTBF को आर्टिकल 21 (राइट टू प्राइवेसी) से जोड़ा जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 के पुट्टास्वामी जजमेंट में प्राइवेसी को फंडामेंटल राइट माना।लेकिन अभी तक कोई अलग कानून नहीं है। कोर्ट केस-बाय-केस देखते हैं। फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़े केस में नोटिस जारी किया है – क्या एक्विटल (बरी होने) के बाद ऑनलाइन न्यूज़ आर्टिकल्स हटाए जा सकते हैं? यह प्राइवेसी vs प्रेस फ्रीडम का बैलेंस करेगा।
कुछ महत्वपूर्ण कोर्ट फैसले:
  • 2024: मद्रास हाई कोर्ट ने एक केस में Indian Kanoon से जजमेंट हटाने का ऑर्डर दिया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे स्टे कर दिया।
  • 2025: दिल्ली हाई कोर्ट ने कुछ केस में न्यूज़ वेबसाइट्स से आर्टिकल हटाने का ऑर्डर दिया।
  • कई हाई कोर्ट्स (केरल, दिल्ली, गुजरात) ने सेन्सिटिव केस (यौन उत्पीड़न, एक्विटल) में RTBF को मान्यता दी।
2026 में सुप्रीम कोर्ट का आने वाला फैसला इस अधिकार की दिशा तय करेगा।DPDP Act 2023 में क्या प्रावधान है?डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 (DPDP Act) भारत का पहला बड़ा डेटा प्राइवेसी कानून है। नवंबर 2025 में इसके रूल्स नोटिफाई हो चुके हैं और 2026 में फुल इम्प्लीमेंटेशन शुरू हो रहा है।
  • सेक्शन 12: राइट टू इरेसूर (डेटा मिटाने का अधिकार) – आप डेटा फिड्यूशरी (कंपनीज) से अपना पर्सनल डेटा डिलीट करवा सकते हैं।
  • लेकिन यह सर्च इंजन्स पर डायरेक्ट लागू नहीं होता। सर्च इंजन्स को "इंटरमीडियरी" माना जाता है।
  • फेज 2 (नवंबर 2026) में पेनाल्टी और डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड का पूरा रोल शुरू होगा।
DPDP Act RTBF का पूरा समाधान नहीं है, लेकिन प्राइवेसी को मजबूत बनाता है।गूगल से अपना पुराना डेटा कैसे डिलीट करवाएं?गूगल के पास पर्सनल इंफॉर्मेशन रिमूवल रिक्वेस्ट का टूल है। भारत में RTBF कानूनी रूप से बाइंडिंग नहीं, इसलिए गूगल हर रिक्वेस्ट एक्सेप्ट नहीं करता। लेकिन आप ट्राई कर सकते हैं।स्टेप-बाय-स्टेप गाइड:
  1. गूगल का रिमूवल टूल ओपन करें → https://support.google.com/websearch/answer/9673730
  2. "Remove personal info" चुनें।
  3. अपना नाम, URL, वजह बताएँ (जैसे अप्रासंगिक, नुकसान पहुँचा रहा)।  गूगल रिव्यू करता है और जवाब देता है (कुछ हफ्तों में)।
  4. अगर गूगल मना करे तो कोर्ट जाएँ → हाई कोर्ट में रिट पिटिशन फाइल करें। कोर्ट ऑर्डर से गूगल मानता है।
सफलता की संभावना: सेन्सिटिव जानकारी (मेडिकल, सेक्शुअल, एक्विटल केस) में ज्यादा। न्यूज़ आर्टिकल्स में मुश्किल।कुछ रियल केस स्टडीज
  • जोरावर सिंह मुंदी केस (2021-2022): गुजरात हाई कोर्ट ने एक्विटल के बाद कोर्ट जजमेंट हटाने का ऑर्डर दिया।
  • 2025 दिल्ली केस: पैटियाला हाउस कोर्ट ने न्यूज़ आर्टिकल्स हटाने का ऑर्डर दिया।
  • कई सेलिब्रिटी और आम लोग कोर्ट से सफल रहे, लेकिन प्रेस फ्रीडम का मुद्दा हमेशा आता है।
सीमाएँ और चुनौतियाँ
  • प्रेस फ्रीडम और पब्लिक इंटरेस्ट → न्यूज़ आर्टिकल्स आसानी से नहीं हटते।
  • इंटरनेट की प्रकृति → एक जगह से हटे तो दूसरी जगह रह सकता है।
  • कोई ऑटोमैटिक अधिकार नहीं → कोर्ट जाना पड़ता है (महंगा और समय लगता है)।
  • 2026 में सुप्रीम कोर्ट फैसला आने के बाद स्थिति क्लियर हो सकती है।
अंतिम सलाहभारत में राइट टू बी फॉरगॉटन अभी विकासशील स्टेज में है। गूगल से डायरेक्ट डिलीट करवाना मुश्किल है, लेकिन असंभव नहीं। पहले गूगल रिक्वेस्ट ट्राई करें, फिर कोर्ट। DPDP Act से प्राइवेसी मजबूत हो रही है।
DISCLAIMER: AdvocateSakar ब्लॉग पर यह लेख केवल जागरूकता के लिए है। यह कानूनी सलाह नहीं है। कोई कार्रवाई करने से पहले योग्य वकील से परामर्श करें। ब्लॉग या लेखक किसी नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं।पोस्ट पसंद आई तो शेयर करें। कमेंट में बताएँ – क्या आपने कभी ऐसा ट्राई किया?
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